जबलपुर नगर कांग्रेस प्रवक्ता रिज़वान अली कोटी बोले-अस्थायी निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री रहे प्रो. बरकतउल्ला का नाम मिटाना दुर्भाग्यपूर्ण, छात्र नेता शफी खान ने कहा-नाम नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारे सरकार
साईडलुक, जबलपुर। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नगर कांग्रेस कमेटी ने शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति में इस प्रस्ताव को स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को मिटाने की कोशिश बताया और सरकार से तत्काल प्रस्ताव वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस ने कहा कि महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रो. बरकतउल्ला भोपाली के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। नगर कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रिज़वान अली कोटी ने कहा कि प्रो. बरकतउल्ला भोपाली प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत की आजादी के लिए विदेश में गठित ‘भारत की अस्थायी निर्वासित सरकार’ के प्रधानमंत्री रहे थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया था।
रिज़वान अली कोटी ने कहा कि मौलाना बरकतउल्लाह साहब केवल एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ही नहीं थे, बल्कि एक लेखक और पत्रकार भी थे। उनका नाम भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके योगदान को स्वतंत्रता संग्राम की जड़ बताते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से उनका नाम हटाना हमारे इतिहास और विरासत के साथ घोर अन्याय होगा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस फैसले से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और इससे सांस्कृतिक पहचान भी कमजोर होगी। संगठन का कहना है कि बरकतउल्लाह साहब का नाम बदलने से छात्रों का कोई हित नहीं होने वाला है।
छात्र नेता शफी खान ने भी प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की पहचान शिक्षा की गुणवत्ता से होती है, नाम बदलने से नहीं। सरकार को चाहिए कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरे, शोध को बढ़ावा दे और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए।
शफी खान ने मांग की कि सरकार नाम बदलने के प्रस्ताव को तत्काल वापस ले और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उन्नयन पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि इससे बरकतउल्लाह साहब के नाम की गरिमा भी बनी रहेगी। कांग्रेस नेताओं ने दो टूक कहा कि नाम बदलने की राजनीति के बजाय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

