साईडलुक, जबलपुर। मनुष्यों को गुण प्राप्ति के लिए ही प्रयत्न करना चाहिए क्योंकि निर्धन होते हुए भी गुणवान अच्छा माना जाता है इसके विपरीत धनवान गुणों से रहित है तो वह अच्छा नहीं माना जाता है संसार में यदि हमें सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं तो गुणों का अर्जन करना चाहिए। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी मंगल परिणय जनकल्याण के लिए किया है। परिवार में श्रीलक्ष्मी नारायण जैसे ही सनातन धर्म में सृष्टि का पालन करना और आर्थिक विकास के लिए मार्ग बनते हैं, जीवन सुखमय होता है।
उक्त उद्गार व्यास पीठ से श्रावण मास के पावन अवसर पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के षष्ठम दिवस श्रीकृष्ण रुक्मिणी मंगल के प्रसंग पर जगतगुरु नरसिंह पीठाधीश्वर डॉ. नरसिंह दास देवाचार्य महाराज ने कहे।
श्रीकृष्ण नंदोत्सव में श्रीराम मंदिर महिला समिति की गीता पांडेय, सुनीता अरोड़ा, सुदेश खुराना, संगीता शर्मा, रुक्मणि अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, अनीता अग्रवाल, संगीता सेठ, बीना मल्होत्रा, भावना मल्होत्रा, सविता भाटिया, श्रीराम मंदिर महिला समिति ने किया है।
श्रीराम मंदिर मदन महल में 7 अगस्त तक दोपहर 3 बजे से आयोजित है।


