”बारिश के पहले पोहा पोहा पार्टी के मायनो की चर्चा”
जबलपुर (नवनीत दुबे)। कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में आने के बाद संस्कारधानी के प्रथम नागरिक महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू में शहर विकास के लिए एक अलग ही जुनून ओर जज्बा दृष्टिगत हो रहा है, और ऐसा हो भी क्यो न भाजपा का नारा ही है सबका साथ सबका विकास,स्वछ शहर, स्वस्थ शहर, विडंबना ही कहेंगे के समूचे शहर वासी जो स्मार्ट सिटी के बाशिंदे कहे जाने लगे है, वो सत्ताधरियों के सियासती जुबान ओर वास्तविकता की धरा पर असुविधाओं के मकड़जाल में उलझ कर खुद को ठगा सा महसूस कर रहे है? मुद्दे की बात पर आते है अभी कुछ माह पूर्व ही निगम की बैठक में करोड़ो के बजट का लोकलुभावन पोहा संस्कारधानी वासियों को बड़े जायकेदार तड़के के साथ परोसा गया था लेकिन हाय री विडंबना करोड़ो के विकास कार्य जिस गति से हो रहे है उसकी तीव्रता इतनी अधिक है के जमीनी स्तर पर वह द्रश्यमान हो ही नही रहे है? विदित हो के भीषड गर्मी में शहरवासी जलसंकट का सामना करते नजर आए है और महापौर ओर उनकी एमआईसी सिर्फ वातानुकूलित कक्ष में बैठकर हर व्यवस्था सुव्यवस्थित होने का ढोल पीटकर खुद की पीठ थपथपाते रहे, तो अब वही मानसून की दस्तक सप्ताह भर में होने वाली है ऐसे में महापौर पुनः वातानुकूलित कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठके कर संस्कारधानी में इस बार जलप्लावन की गंभीर स्थिति निर्मित न होने का दावा कर रहे है साथ ही स्थिति निर्मित होने की दशा में संबंधित विभाग के अधिकारियों पर गाज गिराने की बात कर रहे है, हास्यदपड ही कहेंगे भ्रस्टाचार ओर कमीशन खोरी की भेंट चढ़े विकास कार्यो में गुणवत्ता की बात करना बेमानी ही नजर आता है, ओर वही दूसरी तरफ निगम के हर विभाग के अधिकारियों से लेकर अधीनस्थ तक किसी न किसी दिग्गज नेता का कृपापात्र है और सबके हिस्सबाट का पूरी ईमानदारी से ख्याल भी रखा गया है, निगम के गलियारों की कानाफूसी की माने तो कम्मिशन की बंदर बाट सिर चढ़कर बोल रही है वर्तमान नगर सत्ता में सबका साथ सबका विकास जमकर हो रहा है, निगम के गलियारों से विधानसभा के पदासीन भी इस समय दिन दूनी रात चौगनी तरक्की कर रहे है,वही एक अहम पहलू का भी उल्लेख आवश्यक है बीते दिनों नगर पालिका निगम के महापौर अन्नू सिंह जी द्वारा पोहा पार्टी दी गई जिसे विश्व पोहा दिवस के नाम से अलंकृत किया गया, सोचनीय पहलू है के इतने वर्षों में पहली बार पोहा की दावत देने के पीछे मंशा कय्या होगी? हालांकि जिला कलेक्टर ओलिस अधीक्षक स्थानीय नेताओं के साथ ही पत्रकार जगत के भी सम्मानीय शामिल हुए महापौर की पोहा पार्टी में ओर माननीय द्वारा सभी को भरपूर सम्मान और स्नेह के साथ पोहा खिलवाया गया, सीधीसी बात है चिंगारी को आग बनने में देर नही लगती तो बस हुआ भी यही चर्चाओं का दौर शुरू हुआ और भांति भांति की बाते भी होने लगी कहा तो ये तक गया महापिर जी हर वर्ग को साधने में ओर हाथ मे लेकर चलने में माहिर है, ओर विकास कार्यो में व्यय की जा रही राशि का ब्यौरे का विवरण के लिए कोई आवाज मुखर न कर दे, सियासत है भैया निजलाभः सर्वोपरि होता है? सबसे अहम पहलू ये है कि महापौर अन्नू सिंह द्वारा की गई वचनावली क्यो पूर्णता की ओर अग्रसर है? जिसमे स्वछता,नर्मदा जल की गुणवत्ता व नालों के मिलने वाले पानी को रोकना, सीवर लाइन व्यवस्थित, स्मार्ट सिटी का वास्तविक रूप कय्या ये वादे पूर्ण हो पा रहे है? विचारणीय व सोचनीय है सियासत के मंजे खिलाड़ी संस्कारधानी के स्वछ स्वस्थ स्वरूप के लिए कितने कर्तव्यनिष्ठ ओर जिज्ञासु है?

