जनपद पंचायत बजाग के ग्राम पंचायत पिंडरूखी का मामला…
डिंडौरी,रामसहाय मर्दन| सरकार द्वारा पंचायतों में किए जा रहे भुगतानों में पारदर्शिता लाने के लिए चाहे कितने भी प्रयास क्यों न किए गए हों, लेकिन सरपंच-सचिवों की मिलीभगत से उसमें कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार के रास्ते निकाल ही लिए जाते हैं। तमाम नियमों के बावजूद पंचायतों द्वारा खुलेआम बिना जीएसटी नंबरों के बिलों पर लाखों रू.का भुगतान किया जा रहा है जिससे शासन को जहां एक ओर लगातार राजस्व की क्षति हो रही है, तो वहीं जितना भुगतान पंचायतें करती है उसमें आधा कार्य भी नहीं हो रहा है और जो हो रहा है वह भी घटिया स्तर का हो रहा है।
ये रहा पूरा मामला…
दरअसल जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत पिंडरूखी में विभिन्न मदों से हो रहे भुगतान में लगाए जा रहे बिलों में जमकर धांधली हो रही है। बता दें कि सरपंच सचिव के द्वारा बिना जीएसटी नबंर के बिल लगाए जा रहे है और हैरानी की बात ये है कि अधिकारी भी बिना जीएसटी नबंर वाले बिलों को पास कर भुगतान भी कर दे रहे है, जबकि शासन के नियमानुसार पंचायतों द्वारा पांच हजार से अधिक के बिलों का भुगतान बिना जीएसटी नंबर के नहीं किया जा सकता, इसके बावजूद सरपंच-सचिव के द्वारा अपने चहते सप्लायरों को ग्राम पंचायत के विभिन्न मदों से साम्रगी खरीदी,स्टेशनरी सामग्री,किराना सामग्री और निर्माण कार्यो में खर्च के नाम पर बिना जीएसटी नंबर के बिल लगाकर जमकर धांधली की जा रही है।

पानी वितरण के नाम पर फर्जी बिलों में कर रहे लाखों रू का भुगतान….
बता दें कि ग्राम पंचायत पिंडरूखी में सरपंच अहिल्या बाई और सचिव सुरेन्द्र कुमार मार्को के द्वारा पानी वितरण के नाम पर बिना जीएसटी नंबर के बिलों में 91 हजार का मनमानी तरीके से भुगतान किया गया है, जबकि कुल पानी वितरण का ग्राम पंचायत को प्रस्ताव पारित कर मात्र 30 प्रतिशत भुगतान करने का प्रावधान है,बावजूद जिम्मेदारों के द्वारा 91000 रू का भुगतान 3 सप्लायरों को किया गया है,जिसमें रामफल वासपे को 18 हजार रू. देवरत को 35 हजार रू. अमरसिहं मटेरियल सप्लायर को 20 हजार रू. और 18 हजार रू बिना जीएसटी नंबर के बिलों में भुगतान किया गया है, जिन सप्लायरों को सरपंच ,सचिव के द्वारा भुगतान किया गया है,वे जीएसटी धारक है उनको भी बिना जीएसटी नंबर के सादा कागजों के बिलों में भुगतान किया गया है। जिससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि किस तरह शासकीय राषि का दुरूपयोग करने में अमादा है।
किराना और स्टेशनरी के नाम पर भुगतान लाखों रू का भुगतान….
मजे की बात यह है कि ग्राम पंचायत पिंडरूखी के सरपंच सचिव द्वारा किराना और स्टेशनरी के नाम पर लाखो रू का भुगतान किया जा रहा है, जहां बिना जीएसटी नंबर में बिलों में स्टेशनरी सामग्री खरीदी किया जा रहा है,तो वहीं किराने के दुकान से सामग्री का बिना विवरण लिखे ही प्रषासकीय व्यव के नाम पर शासकीय राशि का बंदरबाट किया जा रहा है। इनके अलावा सरपंच सचिव के द्वारा स्टेशनरी के नाम पर सादा कागजों में फर्जी बिल लगाकर भुगतान किया जा रहा है। साथ ही पंचायत दर्पण ऐप पर अपठनीय बिल की कोपी लगाकर पारदर्षिता की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
इनका कहना है,,
ग्राम पंचायत सफाई और पेयजल के नाम पर 30 प्रतिशत भुगतान प्रस्ताव पारित कर सकती है। बाकी का भुगतान राहत शाखा से की जाती है। सादा कागजों में बिल भुगतान किया जाना गलत है। भुगतान पक्के बिलों में किया जाना चाहिये। इसकी जांच कर कार्रवाई की जायेगी।
मुंशीलाल धुर्वे,सीईओ,बजाग



