महादेव के आंगन में गंदगी का बोलबाला….
जबलपुर (नवनीत दुबे)। हास्यदपद कहे या विडंबना स्मार्ट सिटी का तमगा लगाये संस्कारधानी जबलपुर की सफाई व्यवस्था जिम्मेदार विभाग व जनप्रतिनिधियों को सड़ांध मारती बदबू लेकर जगाने का प्रयास कर रही है। आश्चर्य की बात ही कहेंगे के आखिर ऐसी कौंन सी तगड़ी सेटिंग कर रखी है जो बदहाल शहर बदहाल-लचर सफाई व्यवस्था से जुझते शहर को स्वच्छता रैंकिंग में लाकर अवार्ड मिल रहे है? मुद्दे की बात पर आते है सत्ता लोलुपो के बोलवचन की ही पराकाष्ठा है कि इनकी सुस्त ओर शाहरहित में कार्य करने की इच्छा शक्ति के अभाव के फलस्वरूप ही गंदगी का कोढ़ रहवासी क्षेत्रों में फैला हुआ है, दुखद पहलू ये है कि जो संभवतः धर्म की हुंकार भरने वालों की वास्तविक मंशा को उजागर करती है। विजय नगर के कचनार सिटी में विराजे महादेव आज जनआस्था का विशेष केंद्र है और आस्थावानों का दर्शनार्थ तांता लगा रहता है, किंतु दुर्भाग्य ही कहेंगे की महादेव के आंगन में गंदगी का बोलबाला है, मंदिर प्रांगण के बाहर मार्ग पर मलमूत्र की निकासी का गंदा पानी सड़ांध मार रहा है और श्रद्धालुओं को लाचारी के वशीभूत होकर उसी गंदगी से होकर निकलना पड़ रहा है, आलम ये है कि सड़ांध मारती बदबू धर्ममय माहौल में अपना अस्तित्व स्थापित करके रखे हुए है, पर स्थानीय पार्षद के साथ ही जिम्मेदार विभाग के अधिकारी अपनी मौज में ही मगन है, ओर तो ओर स्थानीय विधायक भी जो स्वयं को सेवक के रूप में दर्शाते नहीं थक रहे वे भी इस व्याप्त गंदगी से अनजान बने हुए है। वैसे ऐसा हो भी क्यो न उत्तरमध्य के विधायक भला क्यों इस समस्या पर ध्यान दें क्योंकि कचनार महादेव का ये क्षेत्र तो बरगी विधानसभा में आता है तो महादेव के आंगन में व्याप्त गंदगी को अलग करने का जिम्मा उन्हीं का बनता है, हालांकि विधायक जैसा दमदार पदासीन ये छूटपुट मुद्दे पर ध्यान क्यों केंद्रित करेंगे, ये तो स्थानीय पार्षद जो भाजपा की है उनका है और नगर पालिका निगम का ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि स्वच्छता के नाम पर चल रही कमीशन की बंदर बांट में माननीयों से महोदयों तक का भरपूर विकास हो रहा है? और कुरूप स्मार्ट सिटी में स्वच्छता का ढोल बस बड़े जोर से पीटा जा रहा है और वास्तविकता की धरा पर ढोल की पोल दृष्टिगत हो रही है।

