अन्य सम्प्रदाय पर टिप्पड़ी मौत का ख़ौफ़ दिखा देती ?
जबलपुर (नवनीत दुबे)। संस्कारधानी में बीते कुछ दिनों से सनातनी हिन्दू आक्रोशित है ,सनातनी हिन्दू से आशय जिसकी पूर्ण आस्था और धर्म के प्रति समर्पण भाव ह्रदय में भरा है, वह हिन्दू नही जो सिर्फ आधुनिकता के मोतियाबिंद का शिकार है और आराध्य देवी देवताओं के अपमान से जिन्हें कोई फर्क नही पड़ता साथ ही जिन्हें हाई सोसाइटी कल्चर का भूत दिल दिमाक में रच बस गया है,ऐसे नपुंसक सिर्फ हिन्दू शब्द तक ही धर्म से जुड़े होने का लाभ लेते है ऐसे कायर सनातनी हिन्दू नही हो सकते ?दुर्भाग्य ही कहेंगे के आवारा मवेशी व श्वान की भांति कुछ सनातन विरोधी आय दिन प्रभु श्री राम का अपमान करते रहते है ?क्योकि इन्हें भलीभांति पता है के सनातन में सर्वधर्म सम्मान का पाठ पढ़ाया जाता है और सनातनी हिन्दू सरल है ओर सियासी आकाओं की बेड़ियों में जकड़ कर चाटुकार की भांति सेवाभावी बनकर रह गया है ? शब्द कटु है पर सोलह आने सत्य है,ओर इसी की बानगी है के विधर्मी शिखंडी ताली के साथ जब चाहे तब मु ह बजाकर ऊलजलूल बोलने का साहस कर पाते है,तो वही ये बात भी सर्वविदित है कि किसी अन्य पंथ सम्प्रदाय के आराध्य पर टिप्पड़ी की गई होती तो कोहराम मच जाता और टिप्पड़ी करने वाले के साथ ही उसके सगे संबंधी भी मौत के ख़ौफ़ में रहने विवश हो जाते हालांकि ऐसे में ये कहना कोई अतिशयोक्ति नही होगा के धर्म के प्रति आस्था,समर्पण,कट्टरता ऐसी ही होनी चाहिए के टिप्पड़ी करने से पहले ही यमराज के दूत साक्षात दिख जाए,खेर जिस तरह से जॉय स्कूल के संचालक अखिलेश मेबिन ने प्रभु श्री राम का अपमान किया उससे एक बात तो स्पष्ट दृष्टिगत होती है के सनातनी बाप दादाओं की वंशबेल में दूसरी प्रजाति के कीड़ों ने मतिभृष्ट कर दी है ?मुद्दे की बात ये है के इतने लंबे समय से पुलिस अखिलेश मेबिन को खोज पाने में लाचार नजर आ रही है ,अब लचरता का वास्तविक कारण क्या है ये तो जिम्मेदार प्रशाशन जाने और सियासी मठाधीश ?संभवतः जल्द ही ये भी दृष्टिगत होगा के माननीय न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई जायेगी, तत्पश्चात खारिज होती है या स्वीकार ये प्रश्नचिन्ह है?अंततः दुर्भाग्य ही कहेंगे के हिन्दुस्तान के आराध्य प्रभु श्री राम जो भाजपाई राजनीति का प्रमुख स्तंभ है उनके हो रहे घोर अपमान के फलस्वरूप अखिलेश मेबिन उज्जदवादिता से भरी सोच और सनातनियो के विरोध में कुंठित मानसिकता के प्रति कय्या रवैया अपनाया जाता है ?साथ ही हर सनातनी के लिए सोचनीय है कि कुछ विधर्मी नरपिशाच आखिर कब तक आराध्य देवी देवताओं का अपमान बेखोफ होकर करते रहेंगे ?

