सरपंच,सचिव और रोजगार सहायक के द्वारा अधिकारियों से मिलीभगत गरीबों के रोजगार में डाला जा रहा डाका…
जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बरखेड़ा का मामला…
डिंडौरी,रामसहाय मर्दन| जहां एक ओर सरकार के द्वारा मजदूरों को सीधे तौर पर आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लोगों को रोजगार की डैम भर रही है,लेकिन गरीबों को रोजगार देने वाला मनरेगा योजना अब भ्रष्टाचार करने का जरिया बन गया है। ये हम नहीं बल्कि डिंडौरी जिले के सातों जनपद पंचायतों के मनरेगा योजना में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरों कह रही है।
बता दें कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का मकसद ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना है,लेकिन ये योजना ज़मीन पर कितनी कारगर है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी के ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार को देखकर लगा सकते है। गौरतलब यह कि इन ग्राम पंचायतों में कागजो में नाला विस्तारीकरण कार्य चला रहा है,बिना कार्य ही सरपंच, सचिव और जीआरएस अधिकारियों से सांठगांठ कर फर्जी मस्टररोल जारी कर लाखों रुपए का खेल किया जा रहा है।

ये रहा पूरा मामला….
दरअसल ताजा मामला ही शहपुरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बरखेड़ा के पोषक ग्राम भरद्वारा का सामने आया है। जहां ग्राम पंचायत बरखेडा के सरपंच, सचिव और जीआरएस के द्वारा बिना कार्य कराए ही फर्जी मस्टररोल जारी शासन को चुना लगाने के जुगत लगे हुए है। वही मामले को लेकर ग्रामीणों के द्वारा सीईओ जनपद पंचायत शहपुरा से शिकायत कर मामले की जांच कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग है।
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों पर आरोप लगाए कि सरपंच, सचिव और जीआरएस के द्वारा मिलीभगत कर मनरेगा योजना से स्वीकृत 6.14 लाख का नाला विस्तारीकरण कार्य में फर्जी मस्टररोल जारी किया जा रहा है ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के पूर्व ग्राम पंचायत के द्वारा 2 से 3 दिनों का कार्य कराया गया था किंतु वर्तमान में ग्राम पंचायत सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के द्वारा बिना कार्य कराए ही विगत दिनांक 03/09/2024 से 09/09/2024 तक का फर्जी मस्टररोल जारी किया गया है जबकि उक्त अवधि के दौरान ग्राम पंचायत में कोई या निर्माण नहीं कराया गया। इस तरह
गरीबों को रोजगार देने वाला मनरेगा योजना अब भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है जहां जिम्मेदारों के द्वारा बिना कार्य किया जा रहा फर्जी मस्टररोल जारी कर गरीबों की रोजगार में डाका डाला जा रहा है। कहना गलत नहीं होगा कि जिन्हें ग्राम विकास की जिम्मेदारी दी गई है वहीं ग्राम पंचायतों को बर्बाद करने में आमादा है। वही शिकायत करने आए ग्रामीणों ने सीइओ मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। अंत में बस एक सवाल कि आखिर कब लगेगी भ्रष्टाचारियों पर लगाम?



