डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन। सरकार द्वारा सरकारी भुगतानों में पारदर्शिता लाने के लिए चाहे कितने भी प्रयास क्यों न किए गए हों, लेकिन सिस्टम की मिलीभगत से उसमें कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार के रास्ते निकाल ही लिए जाते हैं। तमाम नियमों के बावजूद सरकारी धन का खुलेआम नियम विरूद्ध भुगतान किया जा रहा है।
बता दें कि ताजा मामला जनपद पंचायत डिंडौरी में सरकारी धन के दुरुपयोग करने का मामला सामने आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में किए जा रहे लाखों—करोड़ों रुपये के भुगतान में वर्ष 2019 के एक ही पुराने बिल का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बिल बार-बार अलग-अलग भुगतान प्रस्तावों में चिपकाकर दर्शाया गया है, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत है। इस तरह की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से न केवल सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं की अवहेलना है, बल्कि यह भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है। सवाल यह उठता है कि जब जनपद स्तर पर ही इस प्रकार की मनमानी हो रही है, तो ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता की क्या उम्मीद की जा सकती है?
वर्ष 2019 का वह पुराना बिल जिससे बार बार किया इस्तमाल ….

जनपद पंचायत डिंडौरी के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही से अनजान बने हुए हैं या जानबूझकर आंख मूंदे बैठे हैं, यह जांच का विषय है। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके और भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सके। सरकारी खजाने की इस प्रकार की बंदरबांट को लेकर आम जनता में भारी रोष है, और यह मामला अब प्रशासनिक सजगता और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।
वहीं जनपद सदस्य संतोष सिंह चंदेल ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि, “एक ही बिल का बार-बार इस्तेमाल कर जनता के पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। हम मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, ताकि आम जनता का प्रशासन पर विश्वास बना रहे।” सरकारी धन के इस प्रकार दुरुपयोग ने न केवल प्रशासनिक तंत्र की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह मामला अब आम जनता के आक्रोश और अधिकारों से जुड़ गया है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी तेजी और ईमानदारी से कार्रवाई करता है।



