समनापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पडरिया—2 का मामला…
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी के ग्रामीण अंचलों में सरकार के द्वारा विभिन्न योजना से विकास कार्य तो कराए जा रहे हैं, लेकिन जनपद पंचायत के अधिकारियों के द्वारा समय पर निरीक्षण नहीं करने के चलते कई विकास कार्य भृष्टाचार की भेंट चढ़ रहे है।
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को क्रियान्वित करने के लिए 5 वां वित्त और 15 वां वित्त आयोग की सहायता राशि से सीसी सड़क का निर्माण ग्राम पंचायतों के द्वारा कराया जाता है, लेकिन अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में जिम्मेदारों के गुणवत्ताविहीन सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है, जिसके चलते चंद महीनों में लाखों रुपए की लागत से निर्मित सड़कें जर्जर हो रही है,जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
बता दें कि ताजा मामला जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत पड़रिया-2 का सामने आया है जहां में 5 वें वित्त आयोग की 4 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क का निर्माण मुख्य मार्ग से जगदीश महाराज के घर की ओर की जा रही है। आरोप है कि सरपंच—सचिव के द्वारा तय मापदंडों की अनदेखी कर गुणवत्ता में भारी अनियमितता बरती जा रही है।
वहीं लोगों का कहना है सड़क में न तो तकनीकी मापदंडों का पालन किया गया है और न ही निर्माण में गुणवत्ता की कोई ध्यान रखा गया है।
बेस लेयर अधूरी, कंक्रीट की मोटाई मानक 8 इंच की जगह महज 4-5 इंच, और सबसे गंभीर बात यह कि वाइब्रेटर जैसी जरूरी मशीनरी का उपयोग भी नहीं किया गया है।
बिना सूचना पटल के चल रहा लाखों निर्माण…
ग्राम पंचायत पडरिया-2 चार लाखों रू. की लागत से सीसी सड़क निर्माण कार्य काराया जा रहा है। जहां जिम्मेदारों के द्वारा निर्माण स्थल में सूचना पटल लगाना उचित ही नहीं समझा। जबकि कोई भी निर्माण कार्य प्रारंभ कराने से पहले निर्माण स्थल में सूचना पटल पर संबंधित निर्माण कार्य की जानकारी लिखना अनिवार्य है। किंतु जिम्मेदारों के द्वारा शासन के दिशा—निर्देशों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही रहे है। निर्माण स्थल में सूचना पटल नहीं होने के कारण ग्राम के आमजनों समेत अन्य लोंगो को सीसी सड़क की लागत एवं मद समेत अन्य जानकारी नहीं मिल पा रही है। अखिर क्या कारण के उपयंत्री समेत ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों के द्वारा जानकारी छुपाया जा रहा है। जबकि कलेक्टर नेहा मारव्या के द्वारा आदेश जारी किया गया था कि कोई भी शासकीय निर्माण से पहले सूचना पता लगाना अनिवार्य है,लेकिन ग्राम पंचायत की जिम्मेदारों को न तो कलेक्टर के आदेश का फिक्र है न ही कार्रवाई का डर है, तभी तो खुलेआम नियम—निर्देशों की अवहेलना किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन भ्रष्टाचार के मामले में सजगता दिखाएगा? क्या सचिव, सरपंच व उपयंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी? खैर….



