राज्यसभा में गृह मंत्रालय ने किया खुलासा, 11 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम बचाई गई
साईडलुक, नई दिल्ली। अगर आपके मोबाइल पर भी ट्रैफिक चालान भरने का मैसेज आया है तो सावधान हो जाइए। साइबर ठग अब फर्जी ई-चालान भेजकर लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। इस नए तरह के फ्रॉड को लेकर गृह मंत्रालय ने संसद में विस्तृत जानकारी दी है। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि इस तरह के अपराधों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कई स्तरों पर मोर्चा संभाल लिया है।
32 लाख शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये बचाए गए
मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो अपराधों के आंकड़े अपनी रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया में प्रकाशित करता है और नवीनतम रिपोर्ट वर्ष 2024 की है। हालांकि फर्जी ई-चालान से जुड़े मामलों का अलग से आंकड़ा एनसीआरबी नहीं रखता है। वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी आई4सी के तहत वर्ष 2021 में नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली यानी सीएफसीएफआरएमएस शुरू की गई थी। इस प्रणाली ने बड़ी सफलता हासिल की है। 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को ठगों के खाते में जाने से बचा लिया गया है।
2.77 लाख फर्जी ऐप और लिंक ब्लॉक
सरकार ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79 के तहत आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया तेज करने के लिए सहयोग पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल के जरिए गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे कंटेंट को हटाया जा रहा है। आई4सी ने सहयोग पोर्टल के माध्यम से विभिन्न प्लेटफार्मों पर 2,77,053 से अधिक अवैध और धोखाधड़ी वाले ऐप्स, वेबसाइटों, ईमेल खातों और यूआरएल लिंक को ब्लॉक कर दिया है।
राज्यों की जिम्मेदारी, केंद्र का सहयोग
संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य का विषय है इसलिए साइबर अपराध की रोकथाम और जांच की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार गृह मंत्रालय के माध्यम से नीतिगत मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराकर राज्यों का सहयोग कर रही है। पुलिस और न्यायिक अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए आई4सी के तहत साइट्रेन नामक ऑनलाइन पाठ्यक्रम प्लेटफार्म बनाया गया है। 30 जून 2026 तक इस पोर्टल पर 1,63,344 से अधिक अधिकारियों ने पंजीकरण कराया है और 1,61,957 से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
281 साइबर कमांडो तैयार, दो शहरों में फोरेंसिक लैब
देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए गृह मंत्री ने 10 सितंबर 2024 को साइबर कमांडो कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सूचना ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए विशेष दक्ष टीम तैयार करना है। अब तक 281 साइबर कमांडो प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। जांच अधिकारियों की मदद के लिए नई दिल्ली में 18 फरवरी 2019 को और असम में 29 अगस्त 2025 को अत्याधुनिक राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र की स्थापना की गई है। 30 जून 2026 तक नई दिल्ली स्थित केंद्र ने साइबर अपराध से जुड़े 14,064 से अधिक मामलों में राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सहायता दी है। इसके अलावा सर्वोत्तम तौर तरीकों को साझा करने के लिए स्टेट कनेक्ट, थाना कनेक्ट, बैंक कनेक्ट और पीयर लर्निंग सत्र नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।
अब पैसा वापसी और होगी आसान
पीड़ितों को उनका पैसा जल्दी वापस दिलाने के लिए मंत्रालय ने एनसीआरपी और सीएफसीएफआरएमएस के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। इसके तहत शिकायत पर कार्रवाई, बैंकों के साथ समन्वय और लियन मार्किंग हटाने का ढांचा तय किया गया है। अप्रैल 2026 से मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल और शिकायत निवारण मॉड्यूल काम करने लगे हैं जिससे बैंक खातों को फ्रीज करने और ठगी की राशि को असली दावेदार को लौटाने में तेजी आएगी।

