16 वर्षों बाद हो रही देश की जनगणना पूरी तरह से होगी पेपरलेस, पहली बार मिलेगा सेल्फ एन्यूमरेशन का अधिकार
साईडलुक, नई दिल्ली। देश की दशकीय जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गृह मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया है कि जनगणना का पहला चरण यानी गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना देश के 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। शेष बचे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह कार्य सितंबर 2026 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
बर्फीले इलाकों के लिए अलग शेड्यूल, सितंबर में होगी गिनती
सरकार ने दुर्गम और हिमपात वाले क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रम अधिसूचित किया है। भारत के राजपत्र में 3 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर के हिमपातग्रस्त क्षेत्रों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में जनगणना के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना का कार्य 1 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। इसके लिए 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक पुनरीक्षण दौर भी निर्धारित किया गया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक स्व-गणना का विकल्प भी खुला रहेगा ताकि कोई भी व्यक्ति छूट न जाए।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल हो रही है जनगणना
इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना 2027 के पहले चरण के संचालन के लिए डेटा संग्रह हेतु अत्याधुनिक मोबाइल एप्लिकेशन और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली यानी सीएमएमएस पोर्टल सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोग में लाए जा रहे हैं। यह पहली बार है जब उत्तरदाताओं को ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी भरने की यानी स्व-गणना की सुविधा दी गई है। मंत्रालय के अनुसार दूसरे चरण के लिए भी सभी डिजिटल उपकरण और सॉफ्टवेयर पूरी तरह से विकसित कर लिए गए हैं और उनका परीक्षण भी पूरा हो चुका है।
प्रशिक्षण से लेकर भुगतान तक, 4102 करोड़ जारी
इतने बड़े महाअभियान को सफल बनाने के लिए मानव संसाधन की तैयारी भी युद्धस्तर पर चल रही है। मास्टर ट्रेनर, फील्ड ट्रेनर, एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर के प्रशिक्षण का कार्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के समन्वय से अधिसूचित कार्यक्रम के अनुसार पूरा किया जा चुका है और कई जगह यह अंतिम दौर में है। केंद्र सरकार ने इस कार्य के लिए अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 4102 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। यह राशि जनगणना कर्मियों के प्रशिक्षण, मानव संसाधन सहायता, तकनीकी अवसंरचना के निर्माण और जनगणना कर्मियों को मानदेय के भुगतान पर खर्च की जा रही है।

