संसद में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने दिया ब्योरा, बताया कैसे टूट रहा है ड्रग्स माफिया का नेटवर्क
साईडलुक, नई दिल्ली। देश में मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के बढ़ते जाल को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने सरहद से लेकर शहर तक चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि सरकार ने सीमा पार से होने वाली ड्रग्स तस्करी को रोकने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है और इसके नतीजे भी सामने आने लगे हैं।
सरकार ने सीमाओं पर निगरानी को अभेद्य बनाने के लिए अत्याधुनिक संसाधनों को तैनात किया है। सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन, स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली, पीटीजेड कैमरे और नाइट विजन डिवाइस जैसी तकनीकों से हर हरकत पर नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए सीमावर्ती इलाकों में बाड़बंदी को मजबूत किया गया है और नए सीमा चौकी, सड़कें तथा हेलीपैड बनाए गए हैं। अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए गश्त बढ़ाई गई है और संवेदनशील स्थानों पर नाका पॉइंट और मोबाइल टीमों की तैनाती की गई है। खुफिया एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए स्थापित प्लेटफार्मों के जरिए समन्वय को और घनिष्ठ किया गया है और लोगों तथा वस्तुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश और निकास के विशेष बिंदु चिन्हित किए गए हैं।
29 करोड़ लोगों तक पहुंचा नशा मुक्त भारत अभियान
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया नशा मुक्त भारत अभियान अब देशव्यापी आंदोलन बन चुका है। शुरुआत में यह अभियान 272 सबसे संवेदनशील जिलों में चलाया गया था जिसे अगस्त 2023 से देश के सभी जिलों में विस्तारित कर दिया गया है। इस अभियान का विशेष जोर स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालय परिसरों में युवाओं को जागरूक करने पर है। आंकड़े इस अभियान की सफलता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। अब तक इस अभियान के जरिए 29.05 करोड़ से अधिक लोगों को जागरूक किया जा चुका है जिसमें 11.05 करोड़ से अधिक युवा और 7.81 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। इस जन आंदोलन से अब तक 1.17 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र जुड़ चुके हैं जो गांव गांव और मोहल्ले मोहल्ले में नशे के खिलाफ अलख जगा रहे हैं।
2026-2029 का विजन डॉक्यूमेंट और चार स्तरीय प्रहार
ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने के लिए सरकार ने केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को नया आकार दिया है। मादक पदार्थ नियंत्रण पर विजन दस्तावेज 2026-2029 को 26 जून 2026 को जारी किया गया है। इस विजन में चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिसमें प्रवर्तन और खुफिया अभियान, पूर्ववर्ती और सिंथेटिक दवाओं पर नियंत्रण, मांग और हानि में कमी लाना तथा क्षमता निर्माण और समन्वय शामिल है। इस विजन को सभी केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को तय समय सीमा में लागू करना है।
बेहतर समन्वय के लिए चार स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी एनकॉर्ड तंत्र की स्थापना की गई है। केंद्रीय स्तर पर सर्वोच्च और कार्यकारी समिति तथा राज्य स्तर पर राज्य और जिला स्तरीय समिति काम कर रही है। राज्य स्तरीय बैठकों की अध्यक्षता मुख्य सचिव करते हैं जबकि जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट प्रवर्तन और खुफिया जानकारी की समीक्षा करते हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा विकसित एनकॉर्ड पोर्टल सभी हितधारकों के लिए ज्ञान प्रबंधन प्रणाली के रूप में काम कर रहा है।
आदतन तस्करों पर पीआईटीएनडीपीएस का शिकंजा
महत्वपूर्ण मामलों की जांच के लिए संयुक्त समन्वय समिति की बैठकें लगातार हो रही हैं। अब तक केंद्रीय स्तर पर 11 और राज्य स्तर पर 75 जेसीसी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में अपर महानिदेशक या महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में समर्पित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। सरकार ने आदतन अपराधियों की सूची भी तैयार की है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने देशभर में सक्रिय आदतन तस्करों की सूची राज्य पुलिस के साथ साझा की है। इसके आधार पर मादक पदार्थों की अवैध तस्करी की रोकथाम अधिनियम 1988 यानी पीआईटीएनडीपीएस के तहत कड़ी कार्रवाई हुई है। वर्ष 2025 के दौरान देशभर में 810 आदतन तस्करों के खिलाफ हिरासत आदेश जारी किए गए हैं जबकि जून 2026 तक यह संख्या 427 तक पहुंच चुकी है। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के 2024 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों और जब्ती का राज्यवार ब्योरा अनुलग्नक में प्रस्तुत किया गया है।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

