वीर दुर्गादास राठौर, भगवान बलराम, रानी अवन्ति बाई लोधी की जन्म जयंती पर समरसता सेवा संगठन ने किया विचार गोष्ठी एवं पौधारोपण
कजलियां महोत्सव में सहयोग हेतु समाज के प्रतिनिधियों का हुआ सम्मान
साईडलुक, जबलपुर। कोई भी समाज जब तक महापुरुषों को अपनी जाति बिरादरी से ऊपर उठकर नहीं देखेंगे तब तक ना मानव की उन्नति सम्भव है और न ही समाज की उन्नति सम्भव है। वीरों और महापुरुषों के जीवन को पढ़ना सम्भव न हो तो सिर्फ उनके जीवन के किसी अंश को अपने जीवन में उतार ले तो आपका जीवन सफल हो जाये, यह बात चिंतक, विचारक कवि श्री अभिनेष अटल ने समरसता सेवा संगठन द्वारा वीर दुर्गादास राठौर, भगवान बलराम, रानी अवन्ति बाई लोधी की जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए अग्रवाल धर्मशाला, ग्वारीघाट में कही।
समरसता सेवा संगठन द्वारा वीर दुर्गादास राठौर, भगवान बलराम, रानी अवन्ति बाई लोधी की जन्म जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि स्वामी नारायण संस्थान नागपुर के स्वामी मुनि दर्शनजी के, मुख्य वक्ता चिंतक विचारक कवि अनिमेष अटल, विशिष्ट अतिथि स्वामी हरिदासजी, ज्ञानगंगा कॉलेज के डायरेक्टर पंकज गोयल एवं समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन, सचिव उज्जवल पचौरी की उपस्थिति में विचार गोष्टी का आयोजन किया गया। विचार गोष्टी के पश्चात संस्कारधानी क़ज़ालिया महोत्सव में सहयोग करने हेतु विभिन्न समाजो के प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया।
विचार गोष्टी को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता अनिमेष अटल ने कहा जलते हुए कोयले की जब राख बन जाती है उसके बाद जब हम उसमे फूँक मारते तो चिंगारी दिखती है इसी तरह इन अपने कार्यक्रमों के माध्यम से समरसता सेवा संगठन लोगो के अंदर की चिंगारी को जागृत करने के लिए फूँक मारने का काम कर रहा है।
आज हम भगवान बलभद्र, वीर शिरोमणि दुर्गादास राठौर और वीरांगना रानी अवन्ति बाई लोधी की जन्म जयंती पर एकत्र हुए है इन सभी ने किसी एक समाज के उत्थान के लिए कार्य नहीं किया अपितु अपनी मातृभूमि की रक्षा और मानव कल्याण के लिए समाज को एक सूत्र में बाँधने का सन्देश हमें दिया है। लेकिन हम लोगो ने इन्हे समाजो के बंधन में बांध दिया और छुआछूत भेदभाव के कारण मानव की मानव से दूरियां बना दी, इसीलिए मै कहता हूं कि आग हवा पानी जातियों में बाँट दो और नहीं बाँट सकते तो इन खाइयो को पाट दो, क्योंकि यदि देश बचेगा तो धर्म बचेगा धर्म बचेगा तो समाज बचेगा और समाज बचेगा तो हमारी संस्कृति बचेगी और उन्नति सम्भव होंगी।
मुख्य अतिथि स्वामी मुनि दर्शनजी ने अपने आशीर्वाचन में कहा हमारी स्वामी नारायण संप्रदाय में हमारे गुरु जी कहते है सबके भले में हमारा भला है उसी तरह समरसता सेवा संगठन का उदेश्य भी सब सबको जाने और सब सबको माने को लेकर समाज के बीच कार्य कर रहा है और इस तरह के कार्य करने वाले हम सभी का उद्देश्य है कि सबका उत्कर्ष होना चाहिए, सबका कल्याण हो।
उन्होंने काह संस्कृति और देश कि रक्षा के लिए जो कार्य कर रहे है और उसमे आप सभी का सहकार और सहयोग होता है यह अभिनंदनीय है। विचार गोष्ठी को विशिष्ट अतिथि पंकज गोयल ने भी सम्बोधित किया।
समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने स्वागत उद्बोधन और कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा समरसता सेवा संगठन के आह्वान पर सर्व समाज के लोगो ने अपनी सहभागिता से कार्यक्रमों को सफल बनाया और आप सभी के सहयोग से ही विगत दिनों संपन्न कजलिया महोत्सव का सफल आयोजन में हजारों लोगो ने भागीदारी की।
श्री जैन ने कहा हमारी सनातन परम्परा में कहा जाता है धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो और विश्व का कल्याण हो और जब हम सम्पूर्ण विश्व के कल्याण की कामना करते है तो किसी जाति वर्ग की बात नहीं करते अपितु सभी के कल्याण की कामना करते है और जब हम सबका मंगल चाहते है तो हमारे आराध्य, महापुरुषों और देवियो जिन्होने अपनी वाणी, विचार और कार्यों से सर्व समाज को सन्देश दिया लेकिन हमने उन्हें जाति समाज तक सीमित कर दिया जिससे समाज में बिखराव हुआ इसीलिए समरसता सेवा संगठन के माध्यम से हमने तय किया कि सभी आराध्य महापुरुषों कि जन्म जयंती को सर्व समाज के साथ मनाएंगे जिससे सब सबको जाने और सब सबको माने के विचार को लेकर समरस समाज कि स्थापना करने का प्रयास प्रारम्भ किया जिससे हमारा भारत समर्थ बन सके।
सबने मिलकर किया पौधरोपण
विचार गोष्टी के पश्चात सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों ने नर्मदा उद्यान में पौधों का रोपण किया।
इन समाजो के प्रतिनिधियो का हुआ सम्मान
विगत दिनों सम्पन्न संस्कारधानी क़ज़ालिया महोत्सव में सहयोग करने हेतु अग्रवाल समाज, जैन समाज, रजक समाज, स्वर्णकार समाज, बारी समाज, मांझी समाज , सिख समाज, पंजाबी महासंघ, सिंधी समाज, सोनकर समाज, राजपूत समाज, चौरसिया समाज के प्रतिनिधियों का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में कैलाशचंद्र जैन, अनिल जैन गुड्डा, राजेश अग्रवाल गुड्डू, सुरेश सराफ, काके आंनद, सुरेंद्र राठौर, आज़ाद साहू, डॉ. देवकुमार सोनकर, सरदार कुलवीर सिंह, रत्नेश मिश्रा, दास प्रसाद अहिरवार, गोविन्द रजक, चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव, रामबाबू विश्वकर्मा, राजकुमार रजक, विवेक रजक, सनी सोनकर, टिकेंद्र यादव, सुरेश कश्यप, अशोक यादव, वर्षा राठौर, दीपांशु नामदेव, विजय सिंह राठौर, सुनील श्रीवास्तव, सलिल जैन, ममता श्रीवास्तव, अनिल बारी, ओमप्रकाश रावत, राजेन्द्र सरिन, शैलेश सिंह लोधी, दिनेश कुमार राठौर, किशोरी सिंह लोधी, मोहन राठौर, अविनीश यादव, अंशुमान असाठी सुशील रावत, अभिलाषा रजक, अमित दाहिया, भानु श्रीवास्तव, लक्ष्मी राठौर, आदर्श सेन, निशा विश्वकर्मा, रेनू श्रीवास्तव, सुरेन्द्र राजपूत, संजय रजक, कृष्णकुमार वर्मा, राजेश वर्मा, आरके बारी, जीशान अंसारी के साथ बड़ी संख्या में सामाजिक जन उपस्थित थे।

