डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जिले की ग्राम पंचायतों में विकास की राशि का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार अब खुलकर सामने आने लगा है। जनपद अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत झरना घुघरी का मामला ताजा उदाहरण है, जहाँ सरपंच सेवकली धुर्वे और सचिव मानिक लाल सैयाम की आपसी मिलीभगत से ग्राम विकास की राशि को जमकर लूटा गया।
भविष्य की तारीख में बिल पास कर 34,200 रू का भुगतान:
बता दें कि अभी जुलाई माह 2025 है लेकिन पंचायत के जिम्मेदारों के द्वारा 25 दिसंबर 2025 का बिल पास कर दिया 34200 का भुगतान कर दिया गया। चाय—नाश्ते के नाम पर 210 रुपये प्रति प्लेट की दर से मोटी रकम का भुगतान किया गया। सवाल यह है कि पंचायत फंड से ऐसी कौन सी डिश परोसी गई जो 210 रुपये प्रति प्लेट की दर से भुगतान किया गया? यह केवल चाय—नाश्ता था या कोई ‘5 स्टार’ कैटरिंग सेवा का लुप्त उठाया जा रहा है समझ से परे खैर..?
इसके अलावा ” में. ओम ट्रेडर्स” नामक सप्लायर को 5वें वित्त की राशि से ₹34,200 का भुगतान 5 माह पूर्व ही कर दिया गया। यह भुगतान कैसे और किस आधार पर किया गया, इसकी पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
बिना प्रयोजना लाखों का खर्च:
विकास कार्यों के लिए प्रयोजना (प्रस्ताव) आवश्यक होती है। लेकिन पंचायत में बिना किसी स्पष्ट योजना के ही लाखों रुपये खर्च कर दिए गए। फोटो कॉपी, चाय—नाश्ता, पुताई और अन्य खर्चों के नाम पर हुए ये भुगतान नियमों की खुली अनदेखी का प्रमाण हैं।
फोटो कॉपी के नाम पर भुगतान (2023—2025):
₹6000, ₹16800, ₹5000, ₹5800, ₹7200, ₹4440, ₹5000, ₹7200, ₹5000
पुताई/पेंटिंग के नाम पर:
₹9500, ₹3400, ₹9500, ₹9500, ₹9500, ₹20430
“अन्य व्यय” के नाम पर:
₹5000, ₹5000, ₹5000, ₹5560, ₹5035, ₹48000, ₹5000, ₹3650, ₹6250, ₹5000, ₹10500, ₹8000, ₹55575, ₹8300, ₹12300, ₹25500, ₹10500, ₹25589
क्या यही है ग्राम विकास..?
जिस राशि से पंचायत में शौचालय, पेयजल, सड़कों या सामुदायिक भवन जैसे मूलभूत सुविधाएं बननी थीं, वही पैसा चाय-नाश्ता, फोटो कॉपी और पुताई के फर्जी बिलों में उड़ाया जा रहा है। यह न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि ग्रामीणों की उम्मीदों के साथ भी खुला धोखा है।
लापरवाही या लूट की सुनियोजित साजिश..?
भविष्य की तारीख में बिल पास करना, चाय-नाश्ते की अतार्किक दरें तय करना और बिना प्रयोजना लाखों खर्च करना इस ओर इशारा करता है कि ग्राम पंचायत में नियोजन, नियंत्रण और ईमानदारी की पूर्णतः अनदेखी हो रही है।
कौन है जिम्मेदार..?
सरपंच-सचिव की जोड़ी ग्रामीण विकास को निजी लाभ का साधन बनाकर शासन की नीतियों का मखौल उड़ा रही है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ी या सबकुछ मिलीभगत से हो रहा है?
इनका कहना है:
“आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
— लोकेश नारनोरे, सीईओ, जनपद पंचायत अमरपुर, जिला डिंडौरी।

