डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत ग्राम पंचायत कनईसांगवा में मनरेगा योजना के तहत हुए निर्माण कार्यों में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरपंच, सचिव और उपयंत्री की मिलीभगत से पुराने गलीप्लग कार्य पर नई परत चढ़ाकर लाखों रुपये का गबन कर लिया गया। गेबियन निर्माण के नाम पर फर्जी माप पुस्तिका तैयार कर शासन की राशि का दुरुपयोग किया गया है।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व में मनरेगा योजना से गलीप्लग और बोल्डर चेकडैम का निर्माण कराया गया था, जिन स्थानों पर आज भी प्राकृतिक बोल्डर पत्थर की भरमार है। इसके बावजूद वर्ष 2023-24 में इन्हीं स्थलों पर पुनः निर्माण कार्य दिखाकर जीआई तार, बोल्डर परिवहन, स्टोन चिपिंग, डिस्प्ले बोर्ड आदि के नाम पर लाखों का भुगतान कर दिया गया।
इन मदों में हुआ भुगतान…
वित्तीय वर्ष 2023-24 में घुघवा नाला पर गेबियन निर्माण कार्य के लिए स्टोन चिपिंग – ₹7140,बोल्डर परिवहन – ₹23100, स्टील वायर – ₹25135 ➤ कुल भुगतान: ₹55,375 (दिनांक 31 जुलाई 2024) ➤ फर्म: एमआरएन ट्रेडर्स।
इसी प्रकार गेबियन भाग 01 में डिस्प्ले बोर्ड – ₹5000,स्टोन चिपिंग – ₹9800,जीआई वायर – ₹25135,बोल्डर – ₹73100 ➤ कुल भुगतान: ₹1,13,035 (दिनांक 28 जून 2024) सूत्रों के अनुसार गेबियन निर्माण कार्य के विभिन्न भागों – भाग 01, भाग 02, मेड़ा नाला, घुघवा नाला आदि में कुल आठ स्थानों पर कार्य दिखाकर करीब ₹6 लाख 10 हजार रुपये का फर्जी भुगतान किया गया है।
किस खदान से आया बोल्डर..?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपये के बोल्डर पत्थर का परिवहन अगर किया गया, तो वह किस अधिकृत खदान से खरीदा गया? क्या संबंधित फर्म ने खनिज विभाग से रॉयल्टी चुकाई? या फिर अवैध खनन व परिवहन कर शासन को नुकसान पहुंचाया गया?स्थानीय लोगों का कहना है कि गेबियन निर्माण कार्य के नाम पर पुराने निर्माण पर केवल जीआई वायर लपेटकर और माप पुस्तिका में हेरफेर कर योजनागत भ्रष्टाचार किया गया है।
न जांच, न सूचना पटल…
कार्यस्थलों पर कहीं भी सूचना पटल नहीं लगाया गया, जो मनरेगा की अनिवार्य शर्त है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पूरे प्रकरण में पारदर्शिता नहीं रखी गई और शासन की आंखों में धूल झोंकी गई।वहीं अब स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यदि जल्द जांच नहीं हुई, तो यह घोटाला सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर देगा।



