बिना प्रयोजन,अमान्य फोटो के जरिए सरपंच—सचिव ने दिया लाखों रू.का फर्जी भुगतान…
जनपद पंचायत अमरपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत किसलपुरी का मामला….
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जिले के जनपद पंचायत अमरपुर में इन दिनों मुख्य कार्यपालन अधिकारी की निष्क्रियता और उदासीनता के कारण भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुँच चुका है। पंचायत के विकास कार्यों में भारी अनियमितताएँ देखने को मिल रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
ताजा मामला ग्राम पंचायत किसलपुरी का है, जहां सरपंच ऊषा और प्रभारी सचिव नन्द कुमार गौतम के द्वारा केंद्रीय सहायता राशि में भारी अनियमितता बरते हुए नियम विरुद्ध 15 वें वित्त की राशि का भुगतान कर बंदरबांट किया गया है
ये रहा पूरा मामला…
दरअसल ग्राम पंचायत किसलपुरी में सरपंच और प्रभारी सचिव के द्वारा 15 वें वित्त की टाईट फंड की राशि का गाईडलाइन के विपरीत, अन्य व्यव के नाम पर फर्जी बिल, बिना प्रयोजन , बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर लाखों रुपए का भुगतान सप्लायर को मटेरियल खरीदी के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से किया गया है। हैरानी की बात ये है कि अधिकारी भी बिना प्रयोजन के फर्जी बिलों को , अमान्य फोटो बिलों की जांच करे बिना ही लाखों रुपए का बिल पास कर भुगतान कर दिया गया है।
तकनीकी स्वीकृति और जीओ टैग बना मजाक…
बता दें कि ग्राम पंचायत किसलपुरी के ई ग्राम स्वराज में लगे बिलों के अनुसार 2024-25 से 2025- 26 में 15वें वित आयोग के लगभग लाखों रुपयों के बिलों का भुगतान बिना प्रयोजन, बिना जीओ टैग के फर्जी और अमान्य फोटो लगाकर सरपंच,सचिव के द्वारा बंदरबाट किया गया है। 15 वें वित्त योजना में प्रावधान है। कि सरपंच, सचिव को ग्रामसभा में अनुमोदन कराकर ग्राम पंचायत विकास कार्यक्रम में चयनित कार्य को 60 -40 के रेसियो में कराना होता है। इसके तहत स्वच्छता में 30, पेयजल में 30, अधो संरचना में 40 प्रतिशत प्लान के तहत केंद्रीय सहायता राशि 15वें वित्त से ग्राम पंचायत का विकास करना होता है, लेकिन जीपीडीपी कुछ बनाते है और खर्च कुछ और कर रहे है।
बता दें कि ग्राम पंचायत सरपंच— सचिव के द्वारा टाईट फंड पेयजल संबंधी कार्य की राशि का चैक डैम निर्माण किसलपुरी ने पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया है जबकि मजे की बात यह कि चैक डैम का निर्माण हुआ ही नहीं । ” सचिव नन्द कुमार गौतम का कहना कि कन्वर्जेंस की राशि खरमेर नदी चैक डैम विभाग द्वारा जो करवाया गया था उसका भुगतान पंचायत द्वारा किया गया”।
वहीं सरपंच पति का कहना कि अमृत सरोवर का भुगतान किया गया। सरकार और जिला प्रशासन भले ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बजाने में जुटी है लेकिन आज भी सच्चाई से कोसो दूर है जिसका जीता—जागता उदाहरण ग्राम पंचायत किसलपुरी का देख सकता है।
गाइडलाइन को ताक पर रखकर की गई लूट…
गांवों के विकास और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय मद के 15वें वित्त की प्राप्त राशि का ग्राम पंचायत किसलपुरी में गजब ही घोटाला किया जा रहा है। इस मद के लाखों रुपयों की बंदरबांट सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत के अधिकारी कर रहे है। इस मद की राशि के आहरण की भी गजब तोड़ इस तिकड़ी ने निकाल ली है। गौरतलब यह सरकारी धन हड़पने का ऐसा खेल एक अकेले नहीं या बल्कि पूरे जिले की ग्राम पंचायतों में चल रहा है। यही वजह है कि अधिकांश सरपंच , सचिव खाक से फलक तक जा पहुंचे है। 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग और आहरण के लिए सरकार की गाइड लाइन के अनुसार यदि किसी को 50 हजार से ऊपर का भुगतान करना है तो उसके लिए तकनीकी स्वीकृति जरूरी होती है। इससे बचने के लिए सरपंच, सचिवों और जनपद के अफसर ने गजब तोड़ निकाल ली है। इस तोड़ के अनुसार 49 हजार, 45 हजार रुपए का आहरण किया जाने लगा है। इस योजना में एक विशेष बात यह भी है कि जीओ टैग जरूरी होता है, लेकिन यहां इस फार्मूले पर भी धता बताया जा रहा है। 50 हजार के नीचे की राशि में न तकनीकी स्वीकृति की आवश्यकता होती है न ही जीओ टैग की। सचिव, सरपंच अपनी मनमानी से मनचाहे हिसाब से खर्च दर्शाकर राशि का गबन कर रहे है।



