साईडलुक डेस्क। जबलपुर की शैलजा सुल्लेरे एक साधारण परिवार से निकलीं, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत से शासकीय ललित कला महाविद्यालय में कनिष्ठ निदेशक बनीं। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, जो असफलताओं को सीख बनाकर आगे बढ़ीं।
शैलजा का जन्म 29 अगस्त को जबलपुर में हुआ, जहां मां माधुरी सुल्लेरे और परिवार ने उन्हें ईमानदारी, अनुशासन व उच्च संस्कार सिखाए। बचपन से पढ़ाई में तेज और शांत स्वभाव की शैलजा ने जबलपुर के विभिन्न संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की, जिसमें पोस्ट ग्रेजुएशन भी शामिल है। उनकी दृढ़ता ने कम उम्र में ही लक्ष्यों की समझ दी, जो जीवनभर साथ रही।
चुनौतियों से विजय का सफर
पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद नौकरी की तैयारी में कई असफलताओं का सामना किया, लेकिन हर बार खुद को मजबूत बनाया। 2014 में शासकीय ललित कला महाविद्यालय, जबलपुर में कनिष्ठ निदेशक पद पर चयन हुआ, जो उनके त्याग का फल था। यह उपलब्धि केवल नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष का प्रमाण है।
सामाजिक कार्य और नारी सशक्तिकरण
शिक्षिका के अलावा शैलजा ललित कला साधिका हैं, जो गरीब बच्चों की शिक्षा, जरूरतमंद परिवारों की मदद और स्थानीय संस्कृति संरक्षण में सक्रिय हैं। नारी सशक्तिकरण पर उनका विशेष जोर है; महिलाओं को शिक्षा, रोजगार व अधिकारों के प्रति जागरूक कर स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाओं में आत्मविश्वास जागा, जो समाज विकास की कुंजी मानती हैं।
प्रेरणा का संदेश
शैलजा की कहानी सिखाती है कि मजबूत इरादे से कोई परिस्थिति असंभव नहीं। जबलपुर की यह बेटी सेवा व संस्कार की मिसाल बनी हुई है।

