ईवी से लेकर स्मार्टफोन तक की दुनिया बदलेगी, लिथियम के साथ सोडियम बैटरी का भी खुला रास्ता, आईएसीएस और एसएन बोस सेंटर के वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता
साईडलुक, (सत्यजीत यादव)। इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन, लैपटॉप और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए तेज चार्जिंग वाली टिकाऊ बैटरियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले दो प्रमुख संस्थानों इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस यानी आईएसीएस और एसएन बोस राष्ट्रीय बुनियादी विज्ञान केंद्र यानी एसएनबीएनसीबीएस के शोधकर्ताओं ने अगली पीढ़ी की रिचार्जेबल बैटरियों के लिए एक अल्ट्रा फास्ट कार्बनिक एनोड पदार्थ विकसित करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
यह नया पदार्थ एक छिद्रयुक्त कार्बनिक पदार्थ है जिसे सहसंयोजक कार्बनिक ढांचा या कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क यानी सीओएफ कहा जाता है। इस ढांचे की खासियत यह है कि यह बैटरी में ऊर्जा संग्रहित करने वाले छोटे आवेशित कणों यानी लिथियम आयनों को बेहद आसानी और तेजी से आने जाने की सुविधा देता है। अक्सर बैटरियों की सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि तेज चार्जिंग से उनका जीवनकाल घट जाता है, लेकिन इस नए डिजाइन ने इस चुनौती का समाधान निकाल दिया है।
डॉ. उर्मीमाला मैत्रा और डॉ. प्रदीप पचफुले के नेतृत्व में हुआ शोध
यह महत्वपूर्ण सहयोगात्मक शोध आईएसीएस की डॉ. उर्मीमाला मैत्रा और एसएनबीएनसीबीएस के डॉ. प्रदीप पचफुले के नेतृत्व में किया गया है। शोध दल ने विवेकपूर्ण आणविक डिजाइन के जरिए ऐसा सीओएफ पदार्थ तैयार किया है जो भविष्य की रिचार्जेबल बैटरियों को न सिर्फ टिकाऊ और विश्वसनीय बनाता है बल्कि उन्हें बेहद तेजी से चार्ज करने में भी मदद करता है।
प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में इस नई सामग्री से बनी बैटरी ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। इस सामग्री की बदौलत बैटरी महज एक मिनट में 80 प्रतिशत तक चार्ज हो गई। इतना ही नहीं कई बार चार्ज और डिस्चार्ज होने के बाद भी इसका प्रदर्शन उत्कृष्ट बना रहा और इसकी क्षमता में कोई बड़ी गिरावट नहीं देखी गई। शोधकर्ताओं ने एक व्यावहारिक बैटरी उपकरण में भी इस सामग्री का सफल संचालन करके दिखाया है, जिससे वास्तविक दुनिया में इसके उपयोग की क्षमता और भी स्पष्ट हो गई है।
सस्ती सोडियम आयन बैटरियों का भी खुलेगा रास्ता
इस शोध की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि यही सामग्री लिथियम के अलावा सोडियम आयनों को भी संग्रहित करने में सक्षम पाई गई है। इससे भविष्य में किफायती सोडियम आयन बैटरियों के विकास का मार्ग प्रशस्त होता है, जो लिथियम पर निर्भरता को कम कर सकती हैं और भारत जैसे देश के लिए कम लागत वाली ऊर्जा भंडारण तकनीक उपलब्ध करा सकती हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सहयोगात्मक कार्य इस बात का शानदार उदाहरण है कि किस तरह सहसंयोजक कार्बनिक ढांचों का सोच समझकर किया गया आणविक डिजाइन एक साथ तीन बड़े लक्ष्यों को हासिल कर सकता है। यह आयन परिवहन को तेज करता है, आवेश भंडारण को बेहतर बनाता है और संरचनात्मक स्थिरता को भी बनाए रखता है। यह खोज कम लागत, तेजी से चार्ज होने वाले और लंबे समय तक चलने वाले कार्बनिक बैटरी इलेक्ट्रोड विकसित करने की एक प्रभावी रणनीति पेश करती है और सतत ऊर्जा भंडारण की दुनिया में भारत की बड़ी छलांग मानी जा रही है।

