93 फीसदी रकम एफडी में, एक साल में खर्च सिर्फ ₹87.85 लाख; दीपके ने कहा-सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने में लगाया जाए पैसा
साईडलुक, डेस्क। पीएम केयर्स फंड में जमा हजारों करोड़ रुपये और देश के सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सवाल उठाया है कि यदि देश के ग्रामीण इलाकों के सरकारी विद्यालय आज भी भवन, शौचालय, परिवहन, कंप्यूटर, शिक्षकों और दूसरी मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं, तो पीएम केयर्स फंड में उपलब्ध राशि का इस्तेमाल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में क्यों नहीं किया जा सकता। दीपके ने विशेष रूप से करीब ₹8,452 करोड़ के कोष का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि से देश के कितने ग्रामीण स्कूलों की तस्वीर बदली जा सकती थी।
दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है जब पीएम केयर्स फंड के वित्त वर्ष 2024-25 के नवीनतम लेखापरीक्षित खातों के आंकड़े सार्वजनिक चर्चा में हैं। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 को फंड का समापन शेष करीब ₹8,452.06 करोड़ था। इसमें ₹7,846.65 करोड़ यानी लगभग 93 प्रतिशत राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में थी, जबकि करीब ₹605.41 करोड़ बचत बैंक खातों में रखे थे।
एक साल में खर्च ₹1 करोड़ से भी कम
सबसे ज्यादा चर्चा जिस आंकड़े को लेकर हो रही है, वह वित्त वर्ष 2024-25 का भुगतान है। उपलब्ध लेखापरीक्षित विवरण के मुताबिक इस अवधि में पीएम केयर्स फंड से कुल भुगतान लगभग ₹87.85 लाख रहा। इसमें करीब ₹87.84 लाख पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के लिए गया, जबकि शेष ₹451 बैंक और एसएमएस शुल्क के रूप में दर्ज है।
यहां एक जरूरी तथ्य यह भी है कि ₹87.85 लाख को पूरे पीएम केयर्स फंड की स्थापना से अब तक का कुल खर्च समझना सही नहीं होगा। यह आंकड़ा केवल वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज भुगतान को दर्शाता है। इसी तरह ₹8,452 करोड़ को केवल उसी वर्ष में जुटाई गई राशि बताना भी सही नहीं होगा। यह 31 मार्च 2025 को फंड का समापन शेष था।
₹7,846 करोड़ से ज्यादा रकम फिक्स्ड डिपॉजिट में
लेखापरीक्षित आंकड़ों के अनुसार 2024-25 की शुरुआत में फंड में करीब ₹7,173 करोड़ का बैंक बैलेंस था। इसमें ₹6,641.56 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में और ₹531.46 करोड़ बचत खातों में थे। वित्त वर्ष के दौरान घरेलू दान से करीब ₹479.04 करोड़ और विदेशी दान से लगभग ₹92.83 लाख प्राप्त हुए। फिक्स्ड डिपॉजिट से करीब ₹469.37 करोड़ तथा बचत खातों से करीब ₹5.77 करोड़ ब्याज आय हुई।
इसका अर्थ यह है कि उस वित्त वर्ष में फंड को ब्याज से लगभग ₹475 करोड़ की आय हुई, जो नई घरेलू donations से प्राप्त करीब ₹479 करोड़ के लगभग बराबर थी। साल समाप्त होने तक फिक्स्ड डिपॉजिट की राशि बढ़कर ₹7,846.65 करोड़ हो गई और कुल समापन शेष ₹8,452.06 करोड़ रहा।
पीएम केयर्स का उद्देश्य क्या है?
पीएम केयर्स फंड की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इसे 27 मार्च 2020 को सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में स्थापित किया गया था। इसका मूल उद्देश्य कोविड-19 जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति अथवा अन्य आपातकाल, आपदा या संकट में राहत और सहायता उपलब्ध कराना है। आधिकारिक उद्देश्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं के निर्माण या उन्नयन, संबंधित शोध, आपदा अथवा संकट से प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता तथा अन्य संबंधित गतिविधियां शामिल हैं।
इसलिए स्कूलों पर पीएम केयर्स की राशि खर्च करने का सवाल केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि फंड के घोषित उद्देश्यों और किसी प्रस्तावित नई नीति के बीच कानूनी तथा प्रशासनिक संगति का प्रश्न भी है। मौजूदा आधिकारिक जानकारी में सामान्य सरकारी स्कूल निर्माण या नियमित शिक्षा खर्च पीएम केयर्स के अलग से घोषित मुख्य उद्देश्यों में नहीं बताया गया है। ऐसे किसी बड़े बदलाव के लिए ट्रस्ट के नियमों और उद्देश्यों के अनुरूप निर्णय आवश्यक होगा।
दीपके की ‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम से जुड़ा सवाल
अभिजीत दीपके पिछले कुछ दिनों से सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर ‘School Thik Karo’ अभियान चला रहे हैं। 15 अगस्त से शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीण सरकारी विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था की स्थिति को सामने लाना बताया गया है।
19 अगस्त को दीपके ने पीएम केयर्स फंड को स्कूलों की आधारभूत संरचना से जोड़ते हुए कहा कि ₹8,452 करोड़ से बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूलों को बेहतर बनाया जा सकता था। उन्होंने मंत्रियों और राजनेताओं से गांवों के स्कूलों की वास्तविक परिस्थितियों को समझने की अपील भी की।
इससे पहले दीपके सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और अधिकारियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठा चुके हैं। हिंगोली जिले के एक जिला परिषद स्कूल के मामले का हवाला देते हुए उन्होंने शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया और दावा किया कि संबंधित विद्यालय में चार शिक्षकों की जरूरत के मुकाबले केवल दो शिक्षक उपलब्ध थे।
बहस सिर्फ पीएम केयर्स की नहीं, सरकारी शिक्षा की प्राथमिकता की भी
पीएम केयर्स के आंकड़े सामने आने के बाद मूल सवाल यह बनता है कि भारत में सार्वजनिक संसाधनों की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए। एक तरफ देश में अत्याधुनिक संस्थानों, बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्टों और नई आधारभूत संरचनाओं पर लगातार निवेश की चर्चा होती है, दूसरी तरफ अनेक ग्रामीण सरकारी स्कूलों में अभी भी विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
हालांकि पीएम केयर्स फंड का पैसा सामान्य बजट की तरह किसी भी क्षेत्र में सीधे स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। आधिकारिक तौर पर यह एक अलग सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है और इसके धन का उपयोग उसके निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार किया जाता है। इसलिए दीपके की मांग को वर्तमान व्यवस्था में सीधे लागू हो सकने वाले निर्णय के बजाय *नीतिगत बहस और संभावित बदलाव के प्रस्ताव* के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
₹8,452 करोड़ का सवाल अब शिक्षा व्यवस्था के सामने
पीएम केयर्स फंड के नवीनतम आंकड़े एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने रखते हैं। 31 मार्च 2025 को करीब ₹8,452 करोड़ का समापन शेष, उसमें लगभग ₹7,847 करोड़ की फिक्स्ड डिपॉजिट और वित्त वर्ष के दौरान ₹87.85 लाख का भुगतान—इन आंकड़ों ने फंड के उपयोग को लेकर सार्वजनिक बहस को फिर तेज कर दिया है।
दूसरी ओर, ग्रामीण शिक्षा को लेकर दीपके की मुहिम यह सवाल सामने रख रही है कि यदि देश का भविष्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से भी बनना है, तो उन विद्यालयों को मजबूत करने के लिए पर्याप्त और स्थायी संसाधन क्यों नहीं उपलब्ध कराए जा रहे।
पीएम केयर्स का पैसा स्कूलों में लगाया जाए या नहीं, इसका अंतिम फैसला ट्रस्ट के नियमों और सक्षम प्राधिकारियों के स्तर पर ही संभव है। लेकिन दीपके की मांग ने एक व्यापक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—अगर देश के बच्चों के पास मजबूत स्कूल, योग्य शिक्षक और जरूरी सुविधाएं नहीं होंगी, तो बड़ी-बड़ी इमारतों और परियोजनाओं के बीच भारत का भविष्य आखिर तैयार कहां होगा?
CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा:

