ग्राम विकास की राशि में भारी गड़बड़ी, पाकर बघर्रा पंचायत में फर्जी बिल का मामला उजागर, धुंधले बिलों से किया गया लाखों का भुगतान
साईडलुक, डिंडौरी। मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले की ग्राम पंचायतों में इन दिनों विकास की राशि का इस कदर दुरुपयोग और भ्रष्टाचार सामने आ रहा है कि जानकर कोई भी हैरान रह जाएगा। शासन द्वारा भेजी गई लाखों-करोड़ों की राशि जनहित और ग्राम विकास के बजाय फिजूलखर्ची में निपटाई जा रही है। ताजा मामला जनपद डिंडौरी अंतर्गत ग्राम पंचायत पाकर बघर्रा का है, जहाँ सरपंच कौशल सिंह नेताम और तत्कालीन सचिव लड्डू सिंह पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
धुंधले बिलों से किया गया लाखों का भुगतान
फोटो कॉपी, किराना, और अन्य व्ययों के नाम पर धुंधले और संदेहास्पद बिलों से ₹17,067, ₹5,000, ₹16,680, ₹13,000, ₹5,500, ₹15,986 जैसी कई रकमें निकाली गईं। किराना सामग्री के नाम पर भी ₹17,260, ₹7,990, ₹12,520 जैसी बार-बार भुगतान राशि निकाली गई।
निजी खाते में की गई राशि ट्रांसफर
सचिव के निजी खाते में ट्रांसफर, मोबाइल रिचार्ज भी पंचायत फंड से सबसे हैरानी की बात यह रही कि तत्कालीन सचिव के निजी खाते में ₹5,000 और ₹10,000 की राशि ट्रांसफर की गई, जबकि मोबाइल रिचार्ज के नाम पर ₹9,576 की तीन बार और ₹4,500 की एक बार राशि का भुगतान पंचायत खाते से कर दिया गया।
15वें वित्त की राशि भी मनमाने ढंग से उड़ाई
2024-25 और 2025-26 के वर्षों में पंचायत की टाईट और अटाईट राशि से भी भारी गड़बड़ी सामने आई। ऑनलाइन वर्क और फोटोकॉपी के नाम पर “आस्था एमपी”, “काव्य ऑनलाइन”, “अवधिया फोटो कॉपी व कंप्यूटर वर्क” जैसी फर्मों को ₹9,840, ₹9,810, ₹18,446, ₹18,540, ₹11,500, ₹7,816, ₹9,780, ₹17,000, ₹5,000, ₹12,500 जैसी कई भुगतानों से नवाज़ा गया।
मिठाई, किराना, टेंट, फर्जी फोटो सब पर खुलकर लूट
तिरंगा यात्रा, सीएम प्रोग्राम, ग्राम सभा जैसे आयोजनों के नाम पर “खेतेश्वर राजस्थानी स्वीट्स” को ₹16,680, ₹9,900, ₹13,160 दिए गए, वहीं किराना सामग्री के नाम पर ₹8,201, ₹3,246, ₹4,103 का भुगतान किया गया।
नल जल योजना में भी घोटाला
नल जल योजना में भी बिना जिओ टैग्ड फोटो या वर्क आईडी के ₹42,050 और ₹54,100 अंबिका टेंट हाउस को दिए गए। लीच पिट निर्माण कार्य में भी बिना तकनीकी मान्यता और संदिग्ध फोटो से ₹56,000 की राशि ली गई।
कंप्यूटर सामग्री के नाम पर लाखों की बर्बादी
कंप्यूटर और स्टेशनरी सामग्री के नाम पर भी ₹17,842, ₹13,782, ₹24,499, ₹18,020, ₹38,114, ₹45,770 जैसी बड़ी रकम पंचायत फंड से उड़ाई गई। मिठाई, फोटो कॉपी, ऑनलाइन वर्क जैसी फिजूल वस्तुओं में लाखों की ग्राम विकास राशि बहा दी गई, जबकि पंचायत में शौचालय, पेयजल, सड़कों या सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं का निर्माण जरूरी था।
निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की दरकार
सरपंच और सचिव के विरुद्ध निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई न होने से इनके द्वारा शासन की नीतियों, वित्तीय नियमों और ग्रामीणों की अपेक्षाओं के साथ पानी फेरा गया है। सवाल यह कि क्या अब इस गंभीर मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी, क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर इसी तरह ग्राम पंचायत में पारदर्शिता के सिस्टम पर पर्दा डाला रहेगा। खैर आने वाले कुछ दिनों में तय होगा कि लापरवाहों पर ठोस कार्रवाई की जाती है या अभयदान दिया जाता है।

