ई-समन, ई-वारंट और डिजिटल इंटीग्रेशन पर मंथन, रतलाम-अशोकनगर-गुना बने बेस्ट परफॉर्मर, ICJS 2.0 से बदलेगी न्याय व्यवस्था
साईडलुक, भोपाल। राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो (एससीआरबी), पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा रविवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार (मिंटो हॉल) भोपाल में “ICJS Implementation and Digital Integration” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यशाला में इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) के सभी पांच स्तंभ पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एक ही मंच पर एकत्रित हुए और डिजिटल समन्वय को सशक्त बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा और मंचासीन अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया। यह आयोजन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एससीआरबी जयदीप प्रसाद के नेतृत्व तथा पुलिस महानिरीक्षक हरिनारायणचारी मिश्र के समन्वय में संपन्न हुआ। कार्यशाला में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी, जिला न्यायाधीश, पुलिस अधीक्षक, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
आईसीजेएस केवल सॉफ्टवेयर नहीं, राष्ट्रीय मिशन है : एडीजी जयदीप प्रसाद
स्वागत उद्बोधन में एडीजी एससीआरबी जयदीप प्रसाद ने कहा कि आईसीजेएस केवल एक सॉफ्टवेयर परियोजना नहीं, बल्कि देश की संपूर्ण आपराधिक न्याय प्रणाली को डिजिटल रूप से जोड़ने वाला राष्ट्रीय मिशन है। उन्होंने कहा कि पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और स्वास्थ्य विभागों के बीच निर्बाध डिजिटल समन्वय स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने राज्य की वर्तमान प्रगति और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।
भविष्य की न्याय व्यवस्था डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित होगी : न्यायमूर्ति कालगांवकर
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर ने कहा कि आईसीजेएस केवल तकनीकी मंच नहीं, बल्कि पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, फॉरेंसिक और अन्य विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने वाला सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में तकनीक को विधिक मान्यता दी गई है और भविष्य की न्याय व्यवस्था डिजिटल साक्ष्यों, रियल-टाइम सूचना आदान-प्रदान तथा तकनीक आधारित प्रक्रियाओं पर आधारित होगी। उन्होंने ई-समन, ई-वारंट, सीसीटीएनएस आधारित समन्वय और डिजिटल संचार जैसी मध्यप्रदेश की पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीसीटीएनएस 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों से भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक प्रभावी, त्वरित और स्मार्ट बनेगी। उन्होंने डिजिटल चार्जशीट, सुरक्षित डिजिटल स्टोरेज, दस्तावेजों की सुव्यवस्थित इंडेक्सिंग और विभिन्न एजेंसियों के बीच निर्बाध डेटा साझा करने पर बल दिया।
ऑनलाइन प्रक्रियाओं को और मजबूत करना होगा : एसीएस गृह संजय शुक्ला
अपर मुख्य सचिव गृह संजय शुक्ला ने कहा कि प्रशासनिक सुधार और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग में राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं, जबकि ऑपरेशनल एफिशिएंसी, विभागों के बीच डिजिटल इंटीग्रेशन और ऑनलाइन प्रक्रियाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन ने सभी संबंधित विभागों के साथ विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है और भारत सरकार, एनआईसी तथा अन्य एजेंसियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल रैंकिंग में सुधार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है।
तकनीक आधारित पुलिसिंग समय की जरूरत : डीजीपी कैलाश मकवाणा
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि साइबर अपराध, संगठित अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक आधारित पुलिसिंग और आईसीजेएस समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस विवेचना अधिकारियों को टैबलेट उपलब्ध कराकर ई-साक्ष्य, एनएएफआईएस, सीसीटीएनएस और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध बना रही है। उन्होंने कहा कि आईसीजेएस 2.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड एनालिटिक्स और रियल-टाइम डिजिटल इंटीग्रेशन भविष्य की पुलिसिंग को नई दिशा देंगे।
बेस्ट परफॉर्मर अवार्ड से सम्मानित हुए जिले
कार्यशाला के दौरान मुख्य अतिथि द्वारा जून 2025 से मई 2026 की अवधि में सीसीटीएनएस डेटा गुणवत्ता और डेटा एंट्री के आधार पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों को बेस्ट परफॉर्मर अवार्ड प्रदान किए गए। सीसीटीएनएस डेटा रैंकिंग में रतलाम जिले ने प्रथम, अशोकनगर और गुना ने संयुक्त रूप से द्वितीय तथा राजगढ़ जिले ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। फिंगरप्रिंट प्रबंधन और पहचान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए भोपाल कमिश्नरेट, देवास और इंदौर को भी सम्मानित किया गया।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने दिए प्रेजेंटेशन
तकनीकी सत्र में एनसीआरबी नई दिल्ली के उप निदेशक प्रसून गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश आईसीजेएस और सीसीटीएनएस के प्रभावी क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि एनसीआरबी का लक्ष्य “वन कंट्री, वन डेटा, वन एंट्री” के माध्यम से आपराधिक न्याय प्रणाली के सभी स्तंभों के बीच निर्बाध डिजिटल समन्वय स्थापित करना है। आईसीजेएस 2.0 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड एनालिटिक्स, पेपरलेस डेटा शेयरिंग और रियल-टाइम इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं होंगी।
मुंबई के डॉ. सैयद शफीक महदी रिजवी ने डिजिटल फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के महत्व पर व्याख्यान दिया। विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव ने नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया।
व्यावहारिक सत्र में साझा किए अनुभव
दोपहर बाद आयोजित प्रायोगिक सत्र में आईसीजेएस रोड मैप 2026-27 प्रस्तुत किया गया। इंदौर कमिश्नरेट, देवास और रतलाम जिला पुलिस टीमों ने आईसीजेएस डिजिटल इंटीग्रेशन के अंतर्गत अपने नवाचार, सफलता की कहानियां और व्यावहारिक अनुभव साझा किए। प्रत्येक प्रस्तुति के बाद प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। समापन सत्र में समूह चर्चा कर आईसीजेएस के क्रियान्वयन को लेकर ठोस सुझाव एकत्रित किए गए।
इस कार्यशाला में संकलित सुझाव आईसीजेएस के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में सहायक सिद्ध होंगे और विभिन्न पिलर्स के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन इस पहल को निर्णायक उपलब्धि की ओर ले जाएगा।

