जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम खरगहना पंचायत का मामला…
डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| मध्यप्रदेश सरकार द्वारा पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के तमाम प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। डिंडौरी जिले के जनपद पंचायत बजाग अंतर्गत ग्राम पंचायत खरगहना में एक नया मामला सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

5 वें वित्त की राशि का ग्राम पंचायत खरगहना के सरपंच घनश्याम सरैया और सचिव गोवर्धन मरावी ने शासन के निर्देशों को दरकिनार करते हुए 36900 रुपये का भुगतान लकी कंप्यूटर एंड फोटोकॉपी नामक एक फर्म को कर दिया। यह भुगतान स्टेशनरी खरीदी के नाम पर सादे बिल के माध्यम से किया गया, जिसमें न जीएसटी नंबर था, न ही टिन नंबर। इतना ही नहीं, पोर्टल पर अपलोड किए गए अन्य कई बिल भी नियमों के विरुद्ध भुगतान किया गया हैं, जिनमें किराना सामग्री जैसी चीजों की खरीदी दर्शाई गई है।
फर्जी फर्मों के नाम पर हो रहा भुगतान..
सूत्रों से मिल जानकारी के मुताबिक कई ऐसे बिलों पर भुगतान किया गया है जिन फर्मों का अस्तित्व ही संदेहास्पद है। कहीं स्टेशनरी दुकान से गिट्टी और रेत की खरीदी दिखाई जा रही है, तो कहीं इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान से निर्माण सामग्री का भुगतान दर्शाया गया है। यह सब पंचायत स्तर पर व्याप्त गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का प्रमाण है।
शासन के नियमों की उड़ रही धज्जियाँ….
सरकार ने स्पष्ट निर्देशानुसार ₹5000 से अधिक की किसी भी खरीद के लिए वैध जीएसटी नंबर वाला बिल अनिवार्य है। इसके बावजूद, खरगहना पंचायत में नियमों की खुलकर अनदेखी की जा रही है। अधिकारियों की चुप्पी भी कई संदेहों को जन्म दे रही है। वहीं स्थानीय जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी अनियमितताएं बिना संबंधित अधिकारियों की जानकारी और सहमति के संभव नहीं हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
जरूरी है निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई..
अगर ऐसे मामलों में समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह फर्जीवाड़ा पंचायत व्यवस्था की नींव को हिला सकता है। शासन से मांग की जा रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके



