डिंडौरी, राठौर रामसहाय मर्दन| जिले में शिक्षकीय प्रतिनियुक्ति में भारी अनियमितता सामने आई है। मध्यप्रदेश शासन एवं राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बीआरसी, बीएसी और सीएसी पदों पर वर्षों से मनमानी चल रही है। जिन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति अधिकतम दो वर्षों के लिए होनी थी, वे नौ वर्षों से जमे बैठे हैं। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि योग्य शिक्षकों के साथ अन्याय भी है। राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा 2016 में जारी निर्देश के तहत बीआरसी, बीएसी व सीएसी पदों के लिए योग्य शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जानी थी। नियमों के अनुसार, यदि कार्य संतोषजनक हो तो प्रतिनियुक्ति को दो साल तक बढ़ाया जा सकता है, किंतु डिंडौरी जिले में इस प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ कर अधिकारियों और नेताओं के चहेतों को लगातार पदों पर बनाए रखा गया है।

जानकारों का कहना है कि प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया में व्याख्याता, उच्च श्रेणी शिक्षक एवं माध्यमिक शिक्षक ही पात्र होते हैं, लेकिन जिले में पात्रता की बजाय पसंद-नापसंद के आधार पर पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं। अब सवाल उठता है कि जिला प्रशासन और कलेक्टर कब इस स्थिति पर संज्ञान लेंगे? क्या योग्य शिक्षकों की पारदर्शी काउंसलिंग कर नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति की जाएगी, या फिर अधिकारियों की मनमानी यूँ ही जारी रहेगी? शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि डिंडौरी की कलेक्टर शीघ्र ही सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत हो रही इस अनियमितता की गहराई से जांच कर सर्जरी करेंगी, जिससे शिक्षा व्यवस्था को नया आयाम मिल सके।



