जबलपुर। शहर के गौरीघाट स्थित शासकीय आयुर्वेद कॉलेज अस्पताल के ओपीडी में मरीजों द्वारा चेकअप कराने के उपरान्त डॉक्टर द्वारा जो दवा लिखी जा रही हैं और मरीजों से अस्पताल से लेने के लिए कहा जा रहा है, वह अस्पताल के दवाई काउंटर से नहीं मिल पा रही हैं। इतना ही नहीं डॉक्टर ने यदि एक माह की दवा अस्पताल से लेने के लिए लिखा है तो मरीज को 7 दिन की दवा ही दी जा रही है। इस स्थिति में मजबूरी वश मरीजो को बाहर प्राइवेट मेडिकल स्टोर्स से दवा खरीदनी ही पड़ती है। इस अंधेरगर्दी पर अंकुश लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों का कहीं कोई अता-पता नहीं है। मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी फरजाना मिर्जा ने बताया कि, समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार के आधार पर मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में सुनवाई करते हुए, अध्यक्ष मनोहर ममतानी ने मानव अधिकारों के हनन का मामला मानकर, जबलपुर के संभागीय आयुष अधिकारी एवं डीन शा.स्व. आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं चिकित्सालय से मामले की जांच कराकर, अस्पताल में मरीजों के लिए दवाओं की उपलब्धता के संबंध में प्रतिवेदन तथा चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाइयां अस्पताल के बाहर प्रायवेट मेडीकल स्टोर से क्रय किये जाने की स्थिति उत्पन्न होने के संबंध में का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में मांगा है।

