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‘संसद चलो’ मार्च रोकने के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प
साईडलुक, डेस्क। नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन उस समय हिंसक मोड़ पर पहुंच गया, जब प्रदर्शनकारियों ने “संसद चलो” मार्च निकालते हुए संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पहले बैरिकेड लगाए गए, लेकिन भीड़ के आगे बढ़ने और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश के बाद दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। कई स्थानों पर धक्का-मुक्की, अफरा-तफरी और झड़प की स्थिति बन गई।
चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान सोमवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें रोकने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें लाठीचार्ज भी किया गया।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके भी हिरासत में
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कई लोगों को चोटें आईं और अनेक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इसी कार्रवाई के दौरान CJP (Constitution Justice Project/अभियान) के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कार्रवाई बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
संसद मार्च को लेकर पहले से थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने संसद के मानसून सत्र को देखते हुए पहले ही नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। पुलिस का कहना था कि संसद की ओर किसी भी रैली या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है और केवल निर्धारित स्थान पर ही प्रदर्शन की अनुमति थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की।
बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के बाद बढ़ा टकराव
प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने कई स्थानों पर पुलिस बैरिकेड पार करने का प्रयास किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस और RAF के जवानों ने पहले भीड़ को पीछे हटने की चेतावनी दी और हालात नहीं संभलने पर लाठियों का इस्तेमाल किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी धक्का-मुक्की भी हुई।
दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई
घटनाक्रम के बाद संसद भवन, पार्लियामेंट स्ट्रीट, जंतर-मंतर और आसपास के पूरे इलाके में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई। सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ RAF की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गईं। कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा और सुरक्षा कारणों से कुछ मेट्रो स्टेशनों का संचालन भी अस्थायी रूप से प्रभावित किया गया।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण मार्च को बल प्रयोग कर रोका गया और छात्रों व अन्य प्रतिभागियों पर लाठीचार्ज किया गया। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने कहा कि संसद की ओर बिना अनुमति मार्च निकालने की कोशिश कानून-व्यवस्था के लिए खतरा थी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। बाद में पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ दावों का खंडन करते हुए कहा कि हिंसा और कार्रवाई से जुड़े कई दावे भ्रामक हैं।
संसद में भी गूंजा मुद्दा
जंतर-मंतर की घटना की गूंज संसद तक पहुंची। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और छात्रों व प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आरोप लगाया। राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग उठी और सरकार से पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा गया।
आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ाई हलचल
जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन पहले से ही शिक्षा व्यवस्था और विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था। संसद मार्च और उसके दौरान हुई झड़प के बाद यह आंदोलन और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल करता दिखाई दे रहा है। फिलहाल राजधानी में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

